Kumbh Mela 2025 : एक तरफ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ की तैयारी पर अपने आखिरी दौर में चल रही हैं. वहीं दूसरी तरफ कुंभ मेले में शाही स्नान और पेशवाई शब्दों के इस्तेमाल पर पूरे देश में बहस छिड़ गई है. क्योंकि संतों ने महाकुंभ में उर्दू और फारसी शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है. संतों का कहना है कि शाही स्नान और पेशवाई शब्दों का इस्तेमाल हमारी संस्कृति और परंपरा के विपरीत है. बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में उनकी सवारी में शाही शब्द के इस्तेमाल को लेकर उठा विवाद कुंभ मेले तक पहुंच गया है. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने शाही की जगह राजसी स्नान का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. परिषद की ओर से कहा गया है कि शाही की जगह हम अमृत स्नान, दिव्य स्नान, देवत्व स्नान में किसी एक नाम पर भी विचार कर सकते हैं.
इस मसले पर अखाड़ा परिषद ने प्रयागराज में बैठक बुलाने का फैसला किया है, जिसमें सभी 13 अखाड़ों को शामिल किया जाएगा. इस बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योदी आदित्यनाथ के पास भेजा जाएगा और सभी सरकारी अभिलेखों में संशोधित शब्दों के इस्तेमाल की मांग की जाएगी. इससे पहले उज्जैन में बाबा महाकाल की सावन के महीने में निकलने वाली राजसी सवारी में से शाही शब्द को हटा दिया गया था. पहले राजसी सवारी की जगह शादी सवारी शब्द का इस्तेमाल होता था. मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले का संतों ने समर्थन किया था और कुंभ में भी शाही स्नान की जगह राजसी स्नान शब्द के इस्तेमाल की शुरू की थी. (तस्वीर साभार – महा कुंभ प्रयागराज 2025)