रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत- Pakistan border को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा है कि- आज Sindh की जमीन भारत का हिस्सा भले ही ना हो, लेकिन सभ्यता के हिसाब से Sindh हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा और जहां तक जमीन की बात है. तब border बदल जाए कौन जानता है. कल Sindh फिर से भारत में वापस आ जाए.
दिल्ली में सिंधी सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की किताब का जिक्र करते हुए कहा कि – उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि सिंधू हिंदू, खासकर उनकी पीढ़ी के लोग अभी भी Sindh को भारत से अलग नहीं मानते हैं.
सिंध की कहानी
सिंध का इतिहास, प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू होता है. जो 15वीं से 25वीं ईसा पूर्व के बीच विकसित हुई. सिंध हमेशा इस्लामी आक्रमणकारियों के निशाने पर रहा. 711 ईस्वी में अरब आक्रांता मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर कब्जा कर लिया. इसके बाद सिंध इस्लाम के संपर्क में आ गया. 16वीं शताब्दी के अंत तक मुगलों ने इसे जीत लिया. 1843 में अंग्रेजों के कब्जे में आ गया. Sindh की राजधानी कराची थी. 1947 में भारत- Pakistan बंटवारे के बाद यह Pakistan के हिस्से में चला गया. इस बंटवारे के बाद यहां के हिंदू या तो भारत चले आए या फिर वहीं मुस्लिम बन गए. आज Sindh, क्षेत्र के हिसाब से Pakistan की तीसरा सबसे बड़ा प्रांत है. यहां आए दिन अलग सिंधु देश के लिए विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं. (तस्वीर साभार – राजनाथ सिंह फेसबुक पेज से साभार)