क्या आप यकीन करेंगे कि जो मशहूर संगीतकार ए आर रहमान काम न मिलने पर बॉलीवुड पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगा रहे हैं उनका परिवार और वो हिंदू धर्म को लेकर कैसी निम्म स्तर की सोच रखता है। एक बार अपने घर पर आने वाले एक हिंदू को उनकी मां ने कुमकुम तिलक न लगाकर आने को कहा था. यह खुलासा तमिल गीतकार पिरईसूदन ने किया है. उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान रहमान ने उन्हें पुरानी यादें ताजा करने के लिए घर जाकर गाना लिखने के लिए बुलाया लेकिन जब पिरईसूदन रहमान के घर पहुंचे तो उनकी अम्मी ने विभूति और कुमकुम तिलक न लगाकर आने को कहा. इसके बाद पिरईसूदन ने अपने माथे से धार्मिक चिन्ह को हटाने से मना कर दिया.
बात सिर्फ इतनी नहीं है. खुद एआर रहमान कैसी सोच रखते हैं. इसका भी उदाहरण ले लीजिए. एआर रहमान का पुराना नाम दिलीप कुमार है, इससे पहले उन्होंने अपने पिता की मौत के लिए हिंदू देवताओं को जिम्मेदार ठहराया था. ऐसा तब है जबकि ए आर रहमान पैदाइशी मुसलमान नहीं है, उनके परिवार ने एक सूफी के कहने पर इस्लाम स्वीकार किया था जिसने उनकी बच्ची को जान बचाने के नाम पर इस्लाम कबूल करने को कहा था.
काम नहीं मिला तो खेला विक्टिम कार्ड
बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में ए आर रहमान ने कहा था कि पिछले 8 सालों में शायद सत्ता का बदलाव हुआ है और जो रचनात्मक नहीं हैं वह फैसला ले रहे हैं, शायद सांप्रदायिक बात भी रही हो लेकिन मेरे सामने किसी ने नहीं कहा, हां कुछ बातें सुनाई देती हैं, जैसे आपको बुक किया गया, लेकिन दूसरी म्यूजिक कंपनी ने फिल्म फंड की और अपने संगीतकार ले आए. मैं कहता हूं ठीक है मैं आराम करूंगा.
एआर रहमान के आरोपों का फिल्म इंडस्ट्री के ही कई लोगों ने खंडन किया है. गायक शान ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि संगीत में कोई सांप्रदायिक अल्पसंख्यक पहलू है. संगीत इस तरह से काम नहीं करता अगर ऐसा होता तो पिछले 30 सालों के हमारे तीन सुपरस्टार जो अल्पसंख्यक समुदाय से हैं इतनी तरक्की नहीं कर पाते. जावेद अख्तर ने कहा कि मैं कभी ऐसा कुछ महसूस नहीं किया