हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थल चार धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी है. इस दिशा में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने चार धाम और उससे जुड़े हुए प्रमुख तीर्थ स्थलों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं.
समिति का कहना है कि Badrinath और Kedarnath धाम कोई पर्यटन स्थल नहीं है. बल्कि ये हिंदू धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं जहां प्रवेश को नागरिक अधिकार की बजाय धार्मिक परंपरा के तौर पर देखा जाना चाहिए. समिति का यह भी कहना है कि सभी प्रमुख धार्मिक गुरुओं और संत समाज की यही मान्यता रही है कि इन पवित्र तीर्थ में गैर हिंदुओं का प्रवेश नहीं होना चाहिए. हम सनातन परंपराओं का सम्मान करते हुए ये फैसला ले रहे हैं. चार धाम आस्था और साधना का केंद्र है ना की सामान्य पर्यटन स्थल.
बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने कुल 48 मंदिरों, कुंड और धार्मिक स्थलों पर इस लागू करने की तैयारी की है. जिसमें केदारनाथ धाम, बदरीनाथ धाम, तुंगनाथ, मदमहेश्वर, योगी नारायण नरसिंह मंदिर जोशीमठ, गुप्तकाशी, विश्वनाथ मंदिर, तप्त कुंड, ब्रह्मकपाल, शंकराचार्य समाधि, सीतादेवी मंदिर, कुलसारी में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, नंदप्रयाग में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, कालीमठ में श्री महाकाली मंदिर शामिल हैं.
Uttarakhand के Chief Minister Pushkar Singh Dhamiने कहा है कि Devbhoomiउत्तराखंड में जितने भी तीर्थ स्थल हैं उनका संचालन करने वाली संस्थाएं और संगठन जो भी मत बनाएंगे सरकार उसी के मुताबिक आवश्यक कार्रवाई करेगी. जबकि कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना की है. (तस्वीर – केदारनाथ धाम फेसबुक पेज से साभार)