यूजीसी के नए नियमों पर बढ़ते विवाद पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा. केंद्रीय केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि किसी को भी इसका गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा और किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं किया जाएगा
बता दें कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर विवाद चल रहा है. जनरल कैटेगरी के लोग इसे भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. इसको लेकर के एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी है. इस अर्जी में कहा गया है कि यह नियम सामान्य वर्ग के लोगों के साथ भेदभाव करते हैं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं.
यूजीसी से जुड़ा यह विवाद सिर्फ नियमों या फैसलों का नहीं, बल्कि भरोसे और न्याय से भी जुड़ा मामला है.किसी एक पक्ष को सही या गलत ठहराने से पहले जरूरी है कि हर आवाज को सुना जाए और पारदर्शी तरीके से समाधान निकाला जाए. आखिरकार, शिक्षा का मकसद टकराव नहीं बल्कि समान अवसर और इंसाफ होना चाहिए, जिससे कि भविष्य पर इसका नकारात्मक असर न पड़े. इसलिए जल्दबाजी नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और न्याय की जरूरत है. जब तक सभी पक्षों की बात नहीं सुनी जाती, तब तक समाधान अधूरा ही रहेगा. विवाद पर आगे की तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि समाधान कितनी पारदर्शिता और संतुलन के साथ निकाला जाता है. संवाद और न्यायपूर्ण निर्णय ही इस मुद्दे को सुलझाने का रास्ता हो सकता है.