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Iran से बढ़ी तनातनी, Trump ने कहा- हम Strait of Hormuz खोलने के लिए कई देश के युद्धपोत भेजेंगे

Anju Pankaj Desk, March 14, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए बेहद अहम माने जाने वाले समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को खुला और सुरक्षित रखने के लिए वहां युद्ध पोत भेजने की बात कही है. उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz को खुला और सुरक्षित रखने के लिए कई देश अमेरिका के साथ मिलकर युद्ध पोत भेजेंगे. ट्रंप ने चीन, जापान, साउथ कोरिया और ब्रिटेन से भी इस अभियान में में शामिल होने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यहां से गुजरने वाले देशों को इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने में सहयोग करना चाहिए और प्रभावित देशों को अपने जहाज यहां भेजना चाहिए.

ट्रंप के बयान के रणनीतिक मायने

अगर अमेरिका वहां युद्धपोत भेजने और अन्य देशों से भी ऐसा करने की अपील करता है, तो इसके कई संकेत हो सकते हैं: पहला- समुद्री सुरक्षा का बहाना-अमेरिका यह संदेश देना चाहता है कि वह वैश्विक तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए नेतृत्व कर रहा है। दूसरा- ईरान पर दबाव– ईरान ने कई बार संकेत दिया है कि अगर उस पर हमला हुआ या प्रतिबंध बढ़े, तो वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बाधित कर सकता है। युद्धपोत भेजना ईरान को चेतावनी भी हो सकता है। तीसरा अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाना– चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों को शामिल करने की अपील से अमेरिका यह दिखाना चाहता है कि यह सिर्फ उसका युद्ध नहीं बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा का मुद्दा है।

यह जरूरी नहीं कि ये देश सीधे युद्ध में शामिल हों। अधिक संभावना यह होती है कि वे समुद्री गश्त (naval patrol) या काफिला सुरक्षा (escort missions) में हिस्सा लें और तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा दें। लेकिन अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या किसी जहाज पर हमला होता है, तो इससे संघर्ष का दायरा बढ़ने का खतरा जरूर पैदा हो सकता है।

क्या है Strait of Hormuz ?

यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और संकरा समुद्री चोक पॉइंट है. जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यह ईरान और ओमान, यूएई के बीच स्थित है. वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 से 25% हिस्सा यहीं से गुजरता है, जिससे यह विश्व की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत ही रणनीतिक स्थान है. यह लगभग 167 किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसकी सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई केवल 33 से 39 किलोमीटर ही रह जाती है.

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