पाकिस्तान में हिंदूओं के साथ अत्याचार की खबरों कोई नई बात नहीं रह गई है. लेकिन हैरानी की बात है कि उस देश के प्रधानमंत्री हिंदुओं को दिवाली पर शुभकामना देते हैं. लेकिन उनके ही देश में हिंदू सुरक्षित नहीं है. हिंदू बेटियों का तो और ही बुरा हाल है. आए दिन उन्हें उनके मां-बाप की मर्जी के खिलाफ अगवा कर लिया जाता है फिर जबरन धर्म परिवर्तन कराकर किसी बुड्ढे के साथ उसका निकाह करा दिया जाता है. इससे ज्यादा हैरानी की बात ये है कि वहां का कानून और अदालतें चुपचाप सारा तमाशा देखती हैं. कोई किसी की मदद के लिए आगे नहीं आता. ऐसा आजादी के बाद से आज तक हो रहा है.
ताजा मामला पाकिस्तान के सिंध प्रांत का है. जहां एक बार फिर एक हिंदू लड़की इस दरिंदगी का शिकार बनी है. यहां सुनीता नाम की मासूम लड़की पहले अगवा किया गया फिर एक बुजुर्ग मुस्लिम से उसका निकाह करा दिया गया. इसके बाद Hindu समाज के एक नेता की मदद से कोर्ट में मामला गया तो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उस लड़की को उसके परिवार से मिलाया.
सुनीता की किस्मत अच्छी थी, लेकिन सभी हिंदू लड़कियों की किस्मत ऐसी नहीं होती. ज्यादातर इस जुल्म को सहने के लिए मजबूर हैं. ना जाने कितनी हिंदू लड़कियां अपनी अस्मत और अपनी सिसकियां दबाए ना जाने क्या क्या सहते हुए अपनी जिंदगी काट रही होंगी. इसका हिसाब ना तो पाकिस्तान सरकार के पास है औऱ उन जालिमों के पास जो इसे अपना मजहबी ख्वाब मानते हैं. लेकिन उन्हें भूलना नहीं चाहिए इसका हिसाब किताब वो ऊपरवाला जरूर रख रहा होगा. जिसकी इबादत हम सभी करते हैं.