कांग्रेस की मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे पी.चिदंबरम ने Indira Gandhi के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि – Operation Blue Star गलत तरीका था और उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई. उन्होंने कहा कि – मैं किसी सेना के अधिकारी का अनादर नहीं करता, लेकिन जिस तरह से Operation Blue Star चलाया गया, वह बेहद गलत था. कुछ साल बाद हमने सेना को स्वर्ण मंदिर से बाहर रहकर स्वर्ण मंदिर को मुक्त करने का सही तरीका दिखाया. ब्लू स्टार गलत रास्ता था और मैं मानता हूं कि Indira Gandhi ने उस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई. हालांकि यह ऑपरेशन सेना, पुलिस, खुफिया विभाग और सिविल सेवा का मिला जुला फैसला था. आप केवल Indira Gandhi को दोष नहीं दे सकते.
हिमाचल प्रदेश के कसौली में खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव में पत्रकार हरिंदर बावेजा की किताब They will shoot you madam पर चर्चा के दौरान पी.चिदंबरम ने कहा कि पंजाब की असली समस्या इसकी आर्थिक स्थिति है. पंजाब की मेरी यात्राओं से मुझे विश्वास हो गया है कि खालिस्तान और अलगाव का सियासी नारा व्यावहारिक रूप से खत्म हो गया है. अवैध प्रवासी पंजाब से हैं.
क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार?
80 के दशक में खालिस्तानी आंदोलन अपने चरम पर था. विदेशों में रहने वाले सिखों के जरिए उन्हें नैतिक और आर्थिक समर्थन मिलता था. इस दौरान जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में खालिस्तान समर्थकों ने स्वर्ण मंदिर को अपना केंद्र बना लिया और इसे अपने कब्जे में ले लिया. धीरे-धीरे पंजाब आतंकवाद और अराजकता की जद में आ गया. साल 1980 से 1984 के बीच पंजाब में खूब हिंसा हुई. 1983 में स्वर्ण मंदिर परिसर में डीआईजी अटवाल की हत्या कर दी गई. स्वर्ण मंदिर अब किले में बदल चुका था. इसे आतंकियों से मुक्त कराने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने Operation Blue Star चलाया गया. इस 6 जून, 1984 को शुरू की गई ये सैन्य कार्रवाई में 4 दिन तक चली. जिसके बाद स्वर्ण मंदिर को मुक्त करा लिया गया. इस कार्रवाई के बदले के रूप में इंदिरा गांधी के अंगरक्षकों ने ही उनकी गोली मार कर हत्या कर दी.