साल 1971 में बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना द्वारा बंगाली हिंदुओं पर किए गए अत्याचार को नरसंहार घोषित करने की मांग की गई है. इस मांग को लेकर एक प्रस्ताव अमेरिकी संसद में पेश किया गया है. अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंडसमैन ने यह प्रस्ताव अमेरिकी संसद में पेश किया है. इस प्रस्ताव में कहा गया है कि बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना द्वारा बंगाली हिंदुओं पर हुए अत्याचार किए गए. जिसमें बड़ी संख्या में हत्या, महिलाओं और बच्चियों के साथ रेप की घटनाएं हुईं. प्रस्ताव में कहा गया है कि इन घटनाओं को आधिकारिक तौर पर मानवता के खिलाफ अपराध माना जाए, इसके लिए इतिहास के कुछ अहम दस्तावेज का भी जिक्र किया गया है.
क्या कहता है इतिहास?
1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना ने “ऑपरेशन सर्चलाइट” (25 मार्च 1971) के तहत व्यापक दमन अभियान चलाया, जिसमें विशेष रूप से बंगाली हिंदुओं को निशाना बनाए जाने के अनेक प्रमाण मिलते हैं। सेना और उसके स्थानीय सहयोगी संगठनों—अल-बद्र, अल-शम्स और रज़ाकार—पर आरोप है कि उन्होंने गाँवों में घुसकर सामूहिक हत्याएं, लूटपाट और महिलाओं के साथ यौन हिंसा की घटनाएँ कीं।
कई रिपोर्टों के अनुसार, हिंदू समुदाय को “भारत समर्थक” मानकर उनकी पहचान के आधार पर हत्या और उत्पीड़न किया गया; बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर भारत में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। ढाका विश्वविद्यालय सहित कई स्थानों पर बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों की लक्षित हत्याएं भी दर्ज की गईं। अलग-अलग स्रोतों में मृतकों की संख्या भिन्न बताई जाती है, लेकिन यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि इस अवधि में लाखों लोग मारे गए और बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ अत्याचार हुआ, जो 1971 की त्रासदी के सबसे भयावह पहलुओं में गिना जाता है।