आज-कल सोशल मीडिया पर हुई एक बहस की बड़ी चर्चा है. क्या ईश्वर का अस्तित्व है?…Does God Exist ? ये शायद दुनिया का ऐसा सवाल है, जिसका दावे के साथ कोई जवाब देना मुश्किल है. ईश्वर के अस्तित्व पर तर्क सदियों से होते आए हैं. आज तक इंसान किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है. जावेद अख्तर और शमाइल अहमद अब्दुल्ला नदवी की बहस से हर कोई अपने-अपने हिसाब से नतीजा निकाल रहा है. लेकिन सवाल बरकरार है.
ईश्वर ने कभी अपने अस्तित्व का कोई सबूत नहीं दिया और ना ही कभी किसी सबूत से ईश्वर का अस्तित्व खारिज किया जा सका. हर कोई अपने अनुभव और विश्वास के बूते अपने तर्क गढ़ता आ रहा है. ईश्वर है तो दिखता क्यों नहीं, ऐसा तर्क देना भी मूर्खतापूर्ण माना जा सकता है. क्योंकि अगर वो दिख गया तो क्या तुम उसे ईश्वर मान लोगे.
श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था. मैं ही ईश्वर हूं. लेकिन ये सवाल का जवाब नहीं है. इससे ईश्वर के अस्तित्व का कोई सबूत नहीं मिलता. अगर हम विज्ञान के चश्मे से ईश्वर का अस्तित्व तलाशेंगे तो निश्चित रूप से वो नहीं दिखेगा. तर्क और बहस से तो ईश्वर बिल्कुल भी नहीं दिखेगा. लेकिन अगर आस्था और विश्वास के सहारे उसका अस्तित्व तलाशेंगे तो शायद वो हमें खुद के अंदर मिल भी जाएगा.
ऐसा भी कहा जाता है कि कोई फोर्स है जिसने इस दुनिया का निर्माण किया और इसे चला रही है. अगर इसे ईश्वर मान लिया जाए तो सवाल उठता है कि ये फोर्स उस ईश्वर जैसी क्यों नहीं दिखती, जैसी कि दुनिया के सभी धर्मों के लोग मानते हैं.
ईश्वर से अस्तित्व के सवाल का सबसे संतोषजनक जवाब सद्गुरु देते हैं. वो कहते हैं कि लोगों को जिन चीजों की जानकारी नहीं होती. उसकी कल्पना कर लेना उनकी मजबूरी हो जाती है. सद्गुरु कहते हैं कि ईश्वर का अस्तित्व इंसानी समझ और विश्वास से परे है. वो कहते हैं कि ईश्वर कोई वस्तु नहीं है. बल्कि यह एक अनुभव है. ईश्वर के अस्तित्व को तलाशना एक सीमित दृष्टिकोण है. जबकि असली मकसद तो उसे अनुभव करना है. जो हर जीवित प्राणी में ऊर्जा के रूप में मौजूद है. इसलिए ईश्वर को हम तभी पा सकते हैं जब हममें- ‘मैं नहीं जानता’ कहने की ईमानदारी हो. क्योंकि जो कुछ भी हम परिभाषित करते हैं. वह ईश्वर नहीं हो सकता है.