Bangladesh में तख्तापलट के बाद से बदले उसके तेवर और वहां हिंदुओं पर हो रहे हमले के बीच भारत सरकार ने अहम फैसला लिया है. बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों को अपने साथ परिवार रखने की इजाजत नहीं होगी. भारत सरकार द्वारा Bangladesh को नॉन फैमिली स्टेशन घोषित किए जाने के बाद अब उनके परिवारजनों को 8 जनवरी तक स्वदेश लौटने को कहा गया है. जिन परिवार के बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं. उन्हें लौटने के लिए 7 दिन की छूट दी गई है.
बता दें कि Bangladesh में लगातार हिंदू और तमाम अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हिंसा के शिकार हो रहे हैं. कई हिंदुओं को हिंसक भीड़ के हाथों अपनी जान तक गंवानी पड़ी है. वहां की अल्पसंख्यक सरकार मौन है और बेशर्मी से इस हिंसा को देख रही है. मानो इन हिंसा के पीछे उसका ही हाथ हो.
Bangladesh अब भारत विरोधियों का अड्डा बनता जा रहा है. अब वो पाकिस्तान के हाथों की कठपुतली बनता जा रहा है. इस बीच बांग्लादेश में हुई घटनाएं इस बात का इशारा करती हैं कि बांग्लादेश में हो रही हर घटनाओं के पीछे पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं का हाथ है. खैर उस बांग्लादेश से क्या ही उम्मीद की जाए जिसकी आजादी के लिए भारत ने इतनी मदद की, उसके एहसान को वो भूल गया. अब ज्यादा उम्मीद नहीं बची है. भारत को समझना होगा कि Bangladesh ने कभी भी भारत का एहसान नहीं माना. अब तो वो पाकिस्तान के इशारों पर नाच रहा है. इसलिए वो अब ज्यादा घतरनाक होता जा रहा है.