भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. बीजेपी का कहना है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार वक्फ बोर्ड के जरिए प्रदेश में लैंड जिहाद कर रही है. गरीब हिंदुओं की जमीन पर कब्जे की कोशिश हो रही है. इस मसले पर विधानसभा में बीजेपी ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से स्पष्टीकरण मांगा है. विधानसभा में विपक्ष के नेता आर.अशोक ने कहा कि कर्नाटक में हिंदू असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. सरकार को जनता के सामने सही जानकारी और स्पष्टीकरण देकर जिम्मेदारी निभानी चाहिए. उन्होंने कहा कि सिद्धरमैया सरकार को बताना चाहिए कि विजयपुरा जिले में मंदिरों और धार्मिक स्थलों को कितने नोटिस जारी किए गए. आर. अशोक ने आगे कहा कि कांग्रेस की तुष्टिकरण की सियासत की वजह से हिंदुओं को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. कर्नाटक में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं. हिंदू महिलाओं को लव जिहाद के जरिए निशाना बनाया जा रहा है. अब लैंड जिहाद भी शुरू हो गया है.
क्या हिंदू विरोधी है सिद्धरमैया की कांग्रेस सरकार?
अभी दो दिन पहले ही सिद्धरमैया सरकार के एक फैसले से उस पर दोबारा सवाल उठने लगे हैं. सिद्धारमैया सरकार ने दिवाली और दूसरे त्यौहार के दौरान पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है. बता दें कि कांग्रेस की सिद्धरमैया सरकार पर हिंदू विरोधी फैसलों का आरोप लगता रहा है.
इससे पहले सिद्धारमैया सरकार ने मंदिरों पर 10 फीसदी का टैक्स लगाया है. कांग्रेस सरकार कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक 2024 विधानसभा में पास किया है. जिसके मुताबिक सरकार एक करोड़ रुपए से ज्यादा आमदनी वाले मंदिरों से 10 प्रतिशत आय वसूल करेगी. वहीं जिन मंदिरों की कमाई 10 लाख से एक करोड़ के बीच है, उसे 5 प्रतिशत टैक्स देना होगा. इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी और तमाम साधु-संतों ने कांग्रेस सरकार पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया है. प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा का कहना है कि सिद्धारमैया सरकार एंटी हिंदू नीतियों के जरिए सरकार का खजाना भरना चाहती है.
कांग्रेस सरकार को हिंदुओं से नफरत है?
बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस सरकार के इस फैसले से उसकी हिंदू धर्म के लिए उसकी नफरत नजर आती है. बीजेपी ने सिद्धारमैया सरकार पर सवाल उठाया है कि बाकी धर्मों के धार्मिक स्थलों को क्यों छोड़ दिया गया. बीजेपी का आरोप है कि मंदिर से मिलने वाले राजस्व को कांग्रेस अपने दूसरे मकसद पूरा करने में इस्तेमाल करेगी. संत समाज ने भी कांग्रेस सरकार के फैसले की तीखी आलोचना की. साधु-संतों का कहना है कि कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार का ये फैसला मुगलों के जजिया कर की याद दिलाता है. मंदिरों पर टैक्स के मामले पर सिद्धारमैया सरकार का कहना है कि कर्नाटक में 50 हजार पुजारी हैं, जिनकी मदद के लिए वो कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक लाई है. जिसमें टैक्स का प्रावधान नया नहीं है, बल्कि 2003 से अस्तित्व में है. अब सरकार ने उसके स्लैब में कुछ बदलाव किए हैं. सरकार का कहना है कि टैक्स का पैसा पुजारियों की भलाई के लिए इस्तेमाल होगा. (तस्वीर साभार – Chief Minister Of Karnatka फेसबुक पेज से साभर)