प्रधानमंत्री कार्यालय की नई बिल्डिंग सेवा तीर्थ में हुई पहली कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया है कि केरल का नाम बदलकर केरलम कर दिया जाएगा. मोदी कैबिनेट ने केरल सरकार के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बता दे कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन चाहते थे कि केंद्र सरकार संविधान के आठवें शेड्यूल में शामिल सभी भाषाओं में इसका नाम केरल से बदलकर केरलम कर दे. उनका कहना था कि राज्य को मलयालम में केरलम कहा जाता है और मलयालम बोलने वाले समुदाय के लिए एक संयुक्त केरल बनाने की मांग आजादी के आंदोलन के समय से ही उठती रही है.
केरल का इतिहास सदियों पुराना और समृद्ध है। यहाँ विभिन्न राजवंशों का शासन रहा, जिनमें चेर, कोचि और सामुर्द वंश प्रमुख हैं। प्राचीन समय से केरल का तटीय व्यापार और समुद्री संस्कृति प्रसिद्ध रही है; मसालों और वनस्पतियों के लिए यह दुनिया भर में जाना जाता था। केरल की संस्कृति उसकी भौगोलिक विशेषताओं, धर्म, नृत्य, संगीत और साहित्य में परिलक्षित होती है। यहाँ की पारंपरिक नृत्य-शैलियाँ जैसे कथकली और मोहिनीअट्टम, और संगीत की शैलियाँ जैसे सवरूपम और नादस्वरम, राज्य की सांस्कृतिक पहचान हैं। इसके साथ ही, मलयालम भाषा और इसकी साहित्यिक धरोहर, जैसे “अट्टाकाल्पम” और आधुनिक साहित्यिक कृतियाँ, केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं। (तस्वीर – नरेंद्र मोदी फेसबुक पेज से साभार)