धर्म परिवर्तन को लेकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के दर्जे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक अगर कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति अपना धर्म बदलकर कोई दूसरा धर्म अपनाता है तो वह व्यक्ति अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी अन्य धर्म को अपनाने पर अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूरी तरह से खत्म हो जाता है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने फैसला सुनाया कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है. किसी अन्य धर्म को अपनाने के बाद वह व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मई 2025 के फैसले के खिलाफ लगाई गई याचिका पर सुनाया गया है. जिसमें धर्म परिवर्तन के बाद पादरी बने शख्स ने अर्जी लगाई थी कि उन्हें कुछ लोगों से जातिगत भेदभाव और व्यवहार का सामना करना पड़ा.