ईरान की राजधानी तेहरान समेत देश के कई शहरों में इस्लामिक शासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया है. अयातुल्ला अली खोमेनई के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर गए हैं. ये प्रदर्शनकारी ‘मुल्लाओं को छोड़ना होगा देश’ और ‘डेथ टू खोमेनई’ के नारे लगा रहे हैं. सरकार अब इस विरोध को हिंसक तरीके से कुचलने की कोशिश कर रही है. इस वजह से अब तक 35 लोगों की मौत हुई है और 1200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है. अयातुल्ला अली खोमेनई ने चेतावनी दी है कि दंगाइयों को उनकी जगह दिखाई जाएगी.
प्रदर्शन के दौरान हो रही मौतों की वजह से ऐसी आशंका जताई जा रही है कि हालात ऐसे ही रहे तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में दखल दे सकते हैं. क्योंकि ट्रंप ने पिछले दिनों कहा है कि -अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की हिंसक हत्या होती है तो अमेरिका उसकी मदद के लिए आगे आएगा. इस बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद दिया है.
बता दें कि ईरान में जनता महंगाई और अर्थव्यवस्था की खस्ताहाल को लेकर परेशान है. जरूरी सामान भी आम लोगों की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं. इसके लिए वो अयातुल्ला अली खोमेनई सरकार को जिम्मेदार मानती है. इससे पहले ईरान में साल 2022-23 में पूरे देश में आंदोलन हुआ था. जब हिजाब नहीं पहनने पर 22 साल की महसा अमीनी को हिरासत में लिया गया था. उसके बाद उसकी मौत हो गई थी.