ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने मुस्लिम समाज से आबादी बढ़ाने के लिए अपील की है. मुरादाबाद में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने एक नारा दिया- हम दो हमारे दो दर्जन, उन्होंने कहा कि मेरे खुद के आठ बच्चे हैं और मेरे बड़े भाई के 16 बच्चे हैं. हमें ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए. जब अल्लाह बच्चे दे रहा है तो उन्हें स्वीकार करना चाहिए और जब तक देता रहे लेते रहना चाहिए. कुछ लोग मुस्लिम आबादी बढ़ने से परेशान हैं लेकिन आबादी बढ़ने से देश मजबूत होगा.
हालांकि, शौकत अली का यह बयान कई स्तरों पर सवाल खड़े करता है. आज के दौर में जब देश जनसंख्या नियंत्रण, संसाधनों के संतुलित उपयोग और बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर दे रहा है, तब आबादी बढ़ाने की अपील को गैर-जिम्मेदाराना माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी समाज की तरक्की केवल संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और महिलाओं के सशक्तिकरण से होती है.
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान समाज को भावनात्मक रूप से भड़काने का काम करते हैं और परिवार नियोजन जैसे महत्वपूर्ण विषय को नजरअंदाज करते हैं. बढ़ती जनसंख्या का सीधा असर रोज़गार, महंगाई, आवास और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ता है. ऐसे में राजनीतिक नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे जिम्मेदार और दूरदर्शी सोच के साथ बयान दें, ताकि समाज में संतुलित और सकारात्मक संदेश जाए.