राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि जब समाज जाति याद रखता है तो नेता फायदा उठाते हैं. उनका मकसद वोट पाना होता है, काम से वोट नहीं मिलते तो वह जाति से वोट लेते हैं. उन्होंने कहा कि जाति आधारित राजनीति तभी खत्म होगी जब समाज जाति के आधार पर सोचना बंद करेगा. आरएसएस प्रमुख ने कहा की जनसंख्या नियंत्रण नीति और यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे कानून लोगों के सहयोग के बिना सफल नहीं हो सकते.
मोहन भागवत ने कहा कि यूसीसी को लागू करने के लिए कुछ राज्यों ने कदम उठाए हैं. उत्तराखंड में यूसीसी कानून आ चुका है. दूसरे राज्यों में भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले समाज बदलेगा तभी राजनीति बदलेगी केवल जाति भूलने की बात ना करें बल्कि ऐसा व्यवहार करें जैसे जाति है ही नहीं.
मोहन भागवत ने अंतरजातीय संबंध और विवाह को बढ़ावा देने की बात कही. उन्होंने 1942 में महाराष्ट्र में हुए एक अंतरजातीय विवाह का उदाहरण दिया, जिसे भीम राव अंबेडकर और एस गोवलकर ने आशीर्वाद दिया था. मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस सरकार नहीं बल्कि सामाजिक संगठन है. उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को सफल बनाने के लिए लोगों को शिक्षित करना और उनकी भागीदारी जरूरी है. उन्होंने कहा कि जनसंख्या नीति बनाते समय जनसंख्या संतुलन, महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण और हेल्थ जैसे मुद्दों पर जोर देना जरूरी है.